अखंड भारत एवं इसका विखंडन

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अखंड भारत अथवा akhand bharat अथवा greater India

आज से लगभग 2300  वर्ष पूर्व भारत अनेक छोटे छोटे रियासतों में बंटा हुआ था, उसी समय गांधार आज के अफगानिस्थान पर यूनान के सम्राट सिकंदर ने आक्रमण भी कर दिया उस समय  भारत छोटे -छोटे  रियासतों में बँटा हुआ था, राजा भ्रष्टाचार में लिप्त थे एवं करो की अनियमित वसूली होती थी जिससे प्रजा में असंतोष फैला हुआ था।  इन सारी समस्याओं का हल केवल नियम संहिता जिसे आज कानून कहते है के द्वारा ही संभव था। समय की मांग को जानकर चाणक्य ने अर्थशास्त्र  कि रचना कि इस संहिता को हम कौटिल्य अर्थशास्त्र  कहते है।

उस समय का कोई भी राजा सिकंदर का सामना करने योग्य नही था उस समय के महान दार्शनिक चाणक्य को प्रतीत हुआ की छोटी छोटी ईकाइयां किसी बड़े स्तर के बाहरी आक्रमण का प्रतिरोध नही कर सकती अतः चाणक्य ने अखंड भारत की परिकल्पना की इसी समय चाणक्य की मुलाकात चंद्रगुप्त मौर्य से हुई एवं चाणक्य  ने  अपनी अखंड भारत का सपना चन्द्रगुप्त मौर्य की सहायता से पूर्ण किया।

बाद में यह अखंड भारत सम्राट अशोक के शासन कल तक अपनी गरिमा बिखेरता  रहा मगर अशोक के बाद कोई भी राजा इसे कायम नही रख पाया एवं एकता या अखंडता  में कमी की जो क्षति भारतीय संस्कृति, भाषा,साहित्य एवं भारतीय जनमानस विशेषतः देवी सदृश पूजी जानी वाली स्त्रियों को मुस्लिम आक्रमण के बाद  चुकाना पड़ा इसकी कल्पना मात्र से ही ह्रदय व्यथित हो उठता है।

ऐसा भी नही है की संपूर्ण भारतवर्ष मुस्लिम आक्रमण के सामने के सामने घुटने टेक दिया , देश के कई हिस्से जैसा की (अहोम वंश) असम, मराठवाड़ा (महाराष्ट्र) , मेवाड़ (राजस्थान), विजयनगर राज्य (कर्नाटक) ने लंबे समय तक प्रतिरोध करते रहे कई अंत तक विजयी भी रहे। परंतु सामूहिक एकता की कमी भारतवर्ष को कहीं न कहीं काफी महँगी पड़ी।

अखंड भारत में आज के अफगानिस्थान, पाकिस्तान , तिब्बत,  नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका आते है केवल इतना ही नही कालांतर में भारत का साम्राज्य में आज के मलेशिया, फिलीपीन्स, थाईलैंड, दक्षिण वियतनाम, कंबोडिया ,इंडोनेशिया आदि में सम्मिलित थे। सन् 1875 तक (अफगानिस्थान, पाकिस्तान , तिब्बत, नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका) भारत का ही हिस्सा थे लेकिन 1857 की क्रांति के पश्चात ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गई थी उन्हें लगा की इतने बड़े भू-भाग का दोहन एक केंद्र से  करना संभव नही है एवं फुट डालो एवं शासन करो की नीति अपनायी एवं भारत को अनेकानेक छोटे-छोटे हिस्सो में बाँट दिया केवल इतना ही नही यह भी सुनिश्चित किया की कालांतर में भारतवर्ष पुनः अखंड न बन सके।

  1. अफ़ग़ानिस्तान (1876) :विघटन की इस शृंखला का प्रारम्भ अफ़ग़ानिस्तान से हुआ जब सन् 1876 में रूस एवं ब्रिटैन के बीच हुई गंडामक संधि के बाद अफ़ग़ानिस्तान का जन्म हुआ।
  2. नेपाल (1904)
  3. भूटान (1906)
  4. तिब्बत (1914)
  5. श्रीलंका (1935)
  6. म्यनमार (1937)
  7. पाकिस्तान एवं बांग्लादेश (1947)

भारत का गौरव पूर्ण इतिहास हमसे छुपाकर  मार्क्सिस्ट, लेफ्टिस्ट, मिशनरीज पोषित तथाकथित इतिहासकार हमे हमारी ग़ुलामी के अध्याय पर अध्याय पढ़वाते है मगर जब हमारी बहादूरी के किस्से लिखने की बात आती है तो इसे केवल कुछ अनुच्छेदों (paragarphs) तक सीमित कर देते है। भारत का जो इतिहास जो हम स्कूलों एवं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए पड़ते है वह हमारे मनोबल को कम करने  एवं हमे निचले दर्जे का ग़ुलाम बताने के षड़यंत्र का हिस्सा है एवं सारे लेफ्टिस्ट इतिहासकार प्रमुखतः जे.एन.यू. के इस षड़यंत्र का हिस्सा है।

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